परिवारिक रिश्ता पर आधारित है शो:सुप्रिया पिलगांवकर

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प्रेमबाबू शर्मा

सुप्रिया पिलगांवकर टीवी की एक ऐसी अभिनेत्री हैं जिसने हिंदी और मराठी में समान रूप से काम किया है। उनके हिंदी में तकरीबन एक दर्जन धारावाहिक होंगे जिनमें चर्चित शो हैं तू तू मैं मैं, राधा की बेटियां, तू तू मैं मैं सीरीज, कड़ुवी खट्टी मीठी, तथा ससुराल गेंदा फूल आदि। रियलिटी शो नच बलिये में वह अपने पति सचिन पिलगांवकर के साथ थीं। इसके अलावा भी उन्होंने कुछ और रियलिटी शोज किये तथा मराठी की तो वह सुपर स्टार अभिनेत्री हैं। सोनी चैनल के शो ‘‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ में एक खास भूमिका में नजर आ रही हैं। क्या कहना है सुप्रिया का। शो की कहानी क्या हैं ? शो कि कहानी ईश्वरी पर केन्द्रित है,अपने पति को खो देने के बाद वह बच्चों को पालने हेतु बहुत से त्याग करती है। उसका बडा बेटा देव अपनी माँ के खुशी के लिए कुछ भी करने को तत्पर रहता है। वह इसी के चलते अपनी प्रेमिका सोनक्षी से भी दूरी बना लेता है, क्योंकि उसकी माँ उसे पसन्द नहीं करती है। इस शो को लेकर यहां भी एक मां बेटे की कहानी है, जिसमें मां बेटे के लिये दुश्वारियां झेलती है। इसमें नया क्या है? यहां मैंने यानी एक मां ने जो भी सहा वह अपने बेटे को नहीं जताती क्योंकि यह एक सिंपल सी मां की स्टोरी है। संघर्ष उन दोनों मां बेटे का पास्ट है, क्योंकि संघर्ष के दिनों में भी दोनों साथ ही थे उसका बेटा देव छोटा था लेकिन उसे सब पता है। मां कभी देव पर जताती नहीं कि उसने उसके लिये कितना संघर्ष किया लेकिन उसके बारे में आगे कुछ नहीं है क्योंकि मां अपने बेटे के इतने क्लोज है कि अगर कुछ भी नहीं होता तब भी उनकी निकटता वैसी ही होती। दूसरे देव एक ऐसा लड़का है जो मां से बाहर जाने की सोच भी नहीं सकता। फिर मां को क्यों नहीं पसंद है देव द्वारा देखी गई लड़की सोनाक्षी? मैं इसे तरह कहूंगी कि मां को क्यों नहीं पसंद कोई भी लड़की। यह हर मां के भीतर अपने बेटे को लेकर एक असुरक्षा का भाव होता है लेकिन उसे पता ही नहीं है कि मां कई बार यह एक्सेप्ट कर ही नहीं पाती क्योंकि उसे पता ही नहीं कि ऐसा होता है। ऐसा नहीं है कि उसे देव प्यार नहीं करता लेकिन फिर भी अपनी इनसिक्योरिटी को लेकर वह हिल जाती है। अगर उससे कोई इस बारे में पूछेगा तो वह फौरन कहेंगी नहीं ऐसी कोई बात नहीं मैं क्यों इनसिक्योर होने लगी। लेकिन मां यह भी तो सोचती है कि उसका बेटा बड़ा होगा तो उसकी शादी होगी, बहू आयेगी वगैरह वगैरह? सब होता है लेकिन उसके बाद भी तो वह सब होता है जिसको लेकर एक मां शुरू से इनसिक्योर है। तो क्या देव की शादी नहीं होगी? होगी न, क्यों नहीं होगी और शादी के बाद क्या होगा, यही तो एक मां की जर्नी है। इससे पहले भी आप एक स्वीट मां की भूमिका अदा कर चुकी हैं? लेकिन ऐसा रोल मैंने अभी तक नहीं किया। यहां वह कुछ और है इसीलिये मुझे यह चैलेंजिंग लगा। वह वैंप नहीं है लेकिन फिर भी इनसिक्योरिटी की वजह से जिस तरह से बिहेवियर वह करती है, अगर बाद में वह खुद सोचेगी तो उसे विास नहीं होगा कि क्या वाकई उसने ऐसा बिहेव किया। आगे उसे उसका स्वभाव वापस लाना है और वह देव की पत्नी सोनाक्षी के जरिये होगा। आपने मराठी फिल्मों से लेकर हिंदी में काफी काम किया। आप टीवी पर ज्यादा खुश रहती हैं या फिल्मों में? आई लव टीवी। मैंने टेलीविजन पर तू तू मैं मैं के अलावा जो भी काम किया मैं उससे पूरी तरह संतुष्ट हूं। मैंने 1993 में शुरू हुये शो ‘‘क्षितिज ये नहीं’ को बड़ा एंज्वॉॅय किया, फिर उसके बाद तू तू मैं मैं शुरू हो गया था। उसके बाद राधा की बेटियां में भी मैं बा बनी थी। ससुराल गेंदा फूल भी मेरे लिये काफी अच्छा शो साबित हुआ। इस शो की भी मैंने बस एक लाइन सुनी थी कि एक मां बेटे का प्यार क्या और कैसा होता है। उसे जानने के लिये ही मैंने यह शो साइन किया। किसी शो को साइन करने से पहले आप क्या सोचती हैं? मुझे जैसे ही कोई धारावाहिक ऑफर होता है तो हफ्ता भर मुझे यह सोचने में लग जाता है कि इसे कैसे मना करूं, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ यहां मुझे लगा कि यह शो मुझे करना चाहिये। हालांकि मुझे इसके प्रोड्यूसर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन इतना पता था कि यह लोग अच्छे और साफ सुथरे शोज बनाते हैं।

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