रियल एस्टेट (रेगुलेश एंड डेवलपमेंट) एक्ट रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाएगा: फिक्की-ग्रांट थार्नटन रिपोर्ट

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 नई दिल्ली ( अंकित शर्मा )

भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए यह साल रोचक साबित हुआ है| दी रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट (आरईआरए) 1 मई 2016 से लागू हो चुका है| सर्वे आधारित रिपोर्ट ‘फिक्की–ग्रांट थार्नटन कांफ्रेंस ऑन रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट, 2016 (RERA)- आर वी रेडी?’ को फिक्की द्वारा नई दिल्ली स्थित फेडरेशन हाऊस में आयोजित एक सम्मेलन में जारी किया गया| सम्मेलन रियल एएस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट 2016 के दृष्टिकोण से भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए विचार-विमर्श की दिशा तय करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया| सर्वे आधारित रिपोर्ट से उजागर हुआ कि (रेरा) रियल एस्टेट लेनदेन में पारदर्शिता तथा अधिकार लाएगा और मुकदमेबाज़ी में कमी आएगी। यह भी कि RERA से इस सेक्टर पर प्रशासन की पकड़ बढ़ेगी| इससे अंततः निकट भविष्य में इस सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में बढ़ोत्तरी होगी। बाजार में फाईनेंसिंग (या वित्त व्यवस्था) के विकल्पों की उपलब्धता की आसानी में भी सुधार होगा| सर्वे के प्रमुख निष्कर्ष: ———————————- – 65% से अधिक उत्तरदाताओं ने महसूस किया कि इससे आने वाले समय में रियल एस्टेट सौदों में पारदर्शिता बढ़ेगी – उत्तरदाताओं में 60% के करीब महसूस करते हैं कि RERA से इस क्षेत्र में शासन की पकड़ में वृद्धि होगी और निकट भविष्य में इस क्षेत्र में विदेशी (एफडीआई) और घरेलू निवेश में वृद्धि होगी – लगभग 50% उत्तरदाताओं को उम्मीद है कि ऋण विकल्पों की उपलब्था में सुधार होगा और फाईनेंस आसान हो जाएगा। जबकि इसके विपरीत 28% से अधिक ने महसूस किया कि कर्ज़ लेने की प्रक्रिया और अधिक कठोर हो जाएगी – 50% से अधिक उत्तरदाताओं को भरोसा है कि RERA से मुकदमेबाज़ी में कमी आएगी – सर्वेक्षण का एक प्रमुख निष्कर्ष यह है कि रियल एस्टेट उद्योग से जुड़े करीब 40% उत्तरदाताओं का मानना है कि बिक्री आय का 70% एक अलग खाते में जमा करने के नियम से परियोजना की समय पर डिलीवरी प्राप्त करने में मदद मिलेगी और रातोंरात गायब हो जाने वाले ऑपरेटर्स का रियल एस्टेट से सफाया होगा. हालांकि, ऐसे उत्तरदाताओं की भी अच्छी संख्या है जिन्हें लगता है कि इससे नियम से नकदी फंसेगी और बिल्डर आगे महंगे उधार के लिए बाध्य होंगे जिसका अंततः परिणाम उच्च परियोजना लागत होगी RERA के तहत, डेवलपर्स को इसके प्रावधानों और उसके नियमों की जटिलता को समझने के लिए कुछ समय की जरूरत हो सकती है| डेवलपर्स द्वारा कदम RERA के प्रावधानों से पालन करने के लिए अल्पावधि में कीमतों में इज़ाफा हो सकता है| लेकिन हम RERA द्वारा लाई जा रही क्षमताओं के कारण स्थिरीकरण की उम्मीद कर सकते हैं| यह न केवल पहले से चल रही परियोजनाओं के पूरा होने की रफ्तार तेज़ करेगा बल्कि खरीददारों के साथ होने वाली धोखाधड़ी की भी रोकथाम करेगा| भारतीय रिजर्व बैंक ने संभावित घर खरीददारों को सस्ते होम लोन का लाभ उठाने की इजाजत देने के लिए ब्याज दरों पर यथास्थिति बनाए रखी है| डेवलपर्स अब अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की आशा कर रहे हैं जिससे ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में दोबारा जान आएगी| डेवलपर्स द्वारा RERA का अनुपालन करने के लिए इसे अधिक व्यवहारिक बनाए रखना चाहिए. इस एक्ट को अनुमोदन प्राप्ति प्रक्रिया को सरल बनाने के काम आना चाहिए न कि यह मंज़ूरी लेने के मामले में लालफीताशाही बढ़ाने का एक और तरीका बन कर रह जाए| अंततः रियल एस्टेट के महत्व और योगदान को देखते हुए सुधारों की प्रक्रिया को वर्तमान की तरह जारी रखना चाहिए| प्रतिक्रियाओं और व्याख्याओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि रियल एस्टेट सेक्टर ने RERA का स्वागत किया है| गेंद अब राज्य सरकारों के पाले में है जिन्हें 6 महीने की वैधानिक अवधि के भीतर इस एक्ट के अंतर्गत नियमों को अधिसूचित करना है|

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