एफसीटीसी सीओपी7 आयोजन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल में खुदरा व्यापारियों को शामिल करने की अपील

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नई दिल्ली  ( प्रेमबाबू शर्मा )

अखिल भारतीय पान विक्रेता संगठन (एबीपीवीएस), ने लाखों खुदरा व्यापारियों जोकि सीधेतौर पर तंबाकू रिटेल पर निर्भर हैं, की आजीविका की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी से अपील की है। एबीपीवीएस के अनुसार, भारत में 2016 में तंबाकू नियंत्रण (डब्ल्युएचओ एफसीटीसी), पर विश्व स्वास्थ्य संगठन फ्रेमवर्क कन्वेंशन में सरकार को तंबाकू रिटेलरों के खिलाफ कठोर नीतियों पर विचार करने और अपनाने के लिए बाध्य किया जा सकता है। इसका विरोध करने और प्रतिक्रिया जताने के लिए, संघ ने डब्ल्युएचओ एफसीटीसी आयोजन में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली टीम में तंबाकू रिटेलरों को भी शामिल करने की अपील स्वास्थ्य मंत्रालय से की है। एबीपीवीएस ने दावा किया है कि पश्चिमी देशों की मल्टीनेशनल कम्पनियों के प्रभाव के अंतर्गत और सुपरमार्केट्स एवं मेगा मार्केट्स के हितों को प्रमोट करने के लिए एनजीओ, इन सम्मेलनों में डब्ल्युएचओ को, ऐसे समाधान जोकि समस्त भारत के छोटे तंबाकू रिटेलरों की आजीविका पर प्रभाव डालेंगे, को अपनाने के लिए प्रभावित करते रहे हैं। यह अपील केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री, केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री, केन्द्रीय श्रम मंत्री व केन्द्रीय वित्तमंत्री से भी की गई है। एबीपीवीएस यह देखकर आहत है कि तंबाकू विनियमन पर भारत में विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की लाॅबी ने बेहिसाब तंबाकू नियंत्रण नीतियां थोपी हैं, जिनसे देश के लाखों रिटलेर गहन कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और साथ ही उनकी आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन सम्मेलन में सरकार को तंबाकू रिटेलरों के खिलाफ कठोर नीतियों पर विचार करने और उन्हें अपनाने के लिए बाध्य किया जा सकता है। इनमें से अधिकांश रिटेलर छोटे उद्यमकर्ता हैं, जोकि तंबाकू रिटेल से अपने परिवार भरण पोषण करते हैं। राम आश्रय मिश्रा, प्रेजिडेंट, अखिल भारतीय पान विक्रेता संगठन कहते हैं, ‘‘डब्ल्युएचओ एफसीटीसी सम्मेलन में, बंद दरवाजों के पीछे चर्चा की जाएगी, तथा महज कुछ सहभागियों द्वारा निष्कर्ष निकाल लिया जायेगा। इस इण्डस्ट्री पर निर्भर लाखों रिटेलरों के भविष्य पर फैसला करने का क्या यह सही तरीका है? हमें उम्मीद है कि बिना किसी चर्चा के या हमारे जैसे अंशधारकों के बगैर ही गैरव्यावहारिक एवं अनुचित तंबाकू नियंत्रण उपायों का अपना लिया जाएगा। जैसा कि यह सम्मेलन भारत-जोकि एक लोकतांत्रिक देश है, और जिस पर हमें गर्व है, में हो रहा है, इसीलिए इस में राष्ट्र की लोकतांत्रिक परम्पराओं का पालन किया जाना चाहिए और जिनका भविष्य प्रभावित होगा, निश्चय ही उन्हें इस सम्मेलन में भागीदार बनाया जाना चाहिए।’’ अबतक, एनजीओ, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को अपने पक्ष में प्रभावित करने में सफल रहे हैं और परिणामस्वरूप अकारण और अव्यावहारिक तंबाकू नियम देश में लागू किए गए हैं, परिणामस्वरूप देश के गरीब रिटेलरों का उत्पीड़न हो रहा है और उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। भारत में इन विनियमनों, जोकि दुनिया के सबसे बड़े उत्पीड़न हैं, और तंबाकू उत्पादों पर अत्यधिक कर की बदौलत देश में तस्करी कर लाए गए तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता में महत्वपूर्णढंग से वृद्धि हुई है। प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा बड़ी संख्या में तस्करी किए गए तंबाकू उत्पादों का जब्त किया जाना इसका स्पष्ट प्रमाण है।

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