रेल की पटरी बनी “बार”

उत्तर पूर्वी दिल्ली (अंकित शर्मा )
यह नजारा किसी गांव या दूर दराज के इलाके का नहीं है। बल्कि राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी दिल्ली के अशोक नगर सबोली रेलवे फाटक का है। जहाँ पर लड़के 11 बजे से रात के 11 बजे तक शराबियों का जमघट लगता है। रविवार व मंगलवार को तो मानो या मेला ही लगता है। वजह रविवार को सरकारी कर्मचारियों का अवकाश, तो मंगलवार को प्राइवेट कारखानों की छुट्टी छुट्टी पूरा आनंद लेने के लिए शराब पीने वालों का जमघट लगता है यहाँ।
मीत नगर इलाके में वजीराबाद रोड पर देशी व अंग्रेजी शराब के दोनों ठेके है। दिहाड़ी मजदूर अन्य गरीब तबका जहाँ देशी शराब के ठेके से शराब ले यहाँ बैठकर शराब पीता है। ऐसे लोगों की कमी भी नहीं है जो महंगी तथा अंग्रेजी शराब खरीदकर यहाँ पीते है।
खुले में शराब पीने वालों को न तो अपनी इज्जत-बेइज्जती ध्यान है अैर न हीे दूसरों की। उन्हे तो सिर्फ पीने से मतलब है। आती-जाती महिलाओं पर छीटा-कशी यहाँ रोजमर्रा की बात है। आलम यह है कि यहाँ पर बीचरेल की पटरी पर भी बैठकर लोग शराब पीते है। जैसे रेल के आने जाने का टाइम टेबल ही इन्होने बना रखा है। उन्हे न तो अपनी जान की परवाह है और न ही दूसरो की।
शराब पीने वालों के लिए यहाँ पानी के गिलास, ठंडे पानी की थैली भी मिलती है। स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से यहाँ खुले में शराबियों के माध्यम से इनका धंधा भी खुब चल रहा है। शराब पीने वालों के यहाँ गंदगी और कुडे के ढेर के उपर बैठकर मीट मास पका कर बेचने वाले भी मौजूद रहते है। जो लोग नाॅन वैज नहीं लेते उनके लिए गंदे नाले के किनारे बैठकर पकौडे तल कर बैचने का काम भी चल रहा है। यहाँ ये जनता अपने साथ-साथ कर रहे हैे दूसरों के स्वास्थ्य से खिलवाड़।
ऐसा नहीं है कि पुलिस को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है। बल्कि सच्चाई यह कि पुलिस कर्मी जान-बूझकर कर अनजान बनी रहती है। जबकि देर रात षराबी यहाँ उत्पात तो मचाते ही है बल्कि छीना-झपटी व लूटपाट की वारदात को भी अंजाम देते है।
शराबियों द्वारा बड़ी संख्या में फेंके जानी वाली खाली बातले जरूर कुछ बोतल बीनने वालों का कारोबार चला रही है

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