आप के बाद भाजपा नें भी बजाया निगम चुनाव का बिगुल, कांग्रेस अभी खामोश

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नई दिल्ली ( अश्वनी भारद्वाज / वीर अर्जुन )

राजधानी दिल्ली में नगर निगम चुनावो को ले दोनों प्रमुख पार्टियों भारतीय जनता पार्टी तथा आम आदमी पार्टी नें जमीनी स्तर पर तैयारी करनी शुरू कर दी है | जबकि तीसरी प्रमुख पार्टी कांग्रेस अभी विधानसभा चुनाव की हार के सदमे से ही जूझ रही है | हालांकि निगम चुनाव अभी दूर है | लेकिन आम आदमी पार्टी इस बार के निगम चुनाव को ले अभी से बेहद गंभीर है | पार्टी नें कई माह पूर्व निगम चुनाव के लिए बाकायदा दुर्गेश पाठक को निगम चुनाव का प्रभारी बना ये संदेश दे दिया था इस बार रण नहीं महा संग्राम होगा | और तभी से दुर्गेश पाठक कड़ी मेहनत कर रहे हैं | लंबी कसरत के बाद करीब दस दिन पूर्व सभी 272 वार्डों के लिए ना केवल वार्ड स्तर पर टीम घोषित कर दी गयी अपितु वार्ड स्तर पर प्रभारियों की फ़ौज भी तैनात कर दी गई | पार्टी फ़िलहाल पोलिंग स्टेशन स्तर पर कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करने में जुटी है | पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल राय की माने तो ये सूची भी लगभग तैयार है | और जल्द ही संगठन जमीनी स्तर पर बनकर तैयार हो जाएगा |
विधान-सभा के लगातार दो चुनाओं में दिल्ली में लगभग एक तरफा जीत दर्ज करने वाली पार्टी इस बार निगम चुनावों को भी उसी तरह की फील्डिंग से जीतना चाहती है | लिहाजा पार्टी नें इस बार प्रत्याशी चयन से लेकर बूथ स्ट्रेजडी तक पर मंथन करना अभी से शुरू कर दिया है | पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है भाजपा को इस बार घेरने में कोई दिक्कत नहीं आने वाली | स्थानीय मुद्दों पर होने वाले चुनावो में जमीन से जुडकर ही विजय पताका फहराई जा सकती है | निगम की सत्ता में हैट्रिक जमा चुकी भाजपा भी समझ रही है इस बार उसकी राह आसान नहीं है | लिहाजा भाजपा नें भी अभी से अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है | पार्टी की ओर से मंडल स्तर यानि वार्ड स्तर पर आज अध्यक्षों की घोषणा कर दी गई है | ऐसा भाजपा में कम ही होता है | पहले जिला स्तर पर सन्गठन बनाया जाता है और फिर मंडल स्तर पर और उसके बाद बूथ स्तर पर | पिछले चुनाव में तो भाजपा ने एंटी कबेंसी को भांप सभी पुराने पार्षदों के टिकिट काट कर नए चेहरे मैदान में उतार दिए थे, लेकिन इस बार ये फार्मुला नहीं चलने वाला, लिहाजा भाजपा को अपनी रणनीति बदलनी होगी | भाजपा भी इस चुनाव को जमीनी मेहनत से जीतना चाहेगी | लेकिन इसके लिए उसे बूथ स्तर पर जमीन पर आना होगा |
शायद इसीलिए मंडल स्तर पर नियुक्ति के लिए राष्ट्रिय नेत्रत्व को दखलंदाजी करनी पड़ी | जहां तक कांग्रेस का सवाल है पिछले दोनों विधान सभा तथा लोक सभा चुनावों में शुन्य पर सिमटने वाली पार्टी अपनी गलतियों से सबक लेने के मूढ़ में नहीं है | बूथ स्तर पर तो सन्गठन की परिकल्पना कौसों दूर है | अलबत्ता वार्ड स्तर पर सन्गठन के नाम पर ज्यादातर वार्डों में कार्यकारणी तक नहीं बनी है | ऐसे में क्या रहने वाली है कांग्रेस की हालत सहज भाव से अंदाजा लगाया जा सकता है | बुरी तरह से गुटों में विभाजित कांग्रेस विधान सभा चुनाव का मिला मत प्रतिशत भी कायम रखे तो उसकी बड़ी कामयाबी मानी जाएगी |

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