आसान नहीं हैं आम आदमी पार्टी के लिए रोहताश नगर की जंग

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नई दिल्ली ( अश्वनी भारद्वाज )

दिल्ली विधान सभा के चुनावों में रोहताश नगर विधान सभा के तहत कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा | दिल्ली भर में आम आदमी पार्टी की लहर के बावजूद आप पार्टी के लिए रोहताश नगर सीट बचा पाना आसान नहीं होगा | पार्टी तमाम यत्न करके भी यहां जीत दर्ज नहीं कर पाएगी, ऐसा हमारा आकंलन है | ये आकंलन जमीनी स्तर पर जुटाई जानकारी के आधार पर है | केजरीवाल सरकार के काम-काज के आधार पर पार्टी दूसरे स्थान पर तो जरुर रहेगी लेकिन जीत के लिए पार्टी को अपनी रणनीति बदलनी होगी |
रोहताश नगर विधान सभा क्षेत्र का इतिहास अजीबो गरीब है | इस विधान सभा क्षेत्र के वोटर हर चुनाव में अपना विधायक बदल देते हैं | रामबाबू शर्मा जरुर इसके अपवाद रहे हैं | केवल वो ही यहां से दो बार जीत दर्ज कर सके हैं लेकिन वो जीतने के चंद दिनों बाद ही स्वर्ग सिधार गये और यहाँ उप चुनाव कराना पड़ा | विधान सभा गठन के बाद हुए चुनाव में भाजपा के आलोक कुमार त्रिकोंणीय मुकाबले में जीते थे | अगले चुनावों में जनता ने उन्हें नकार कांग्रेस के राधेश्याम खन्ना को विधायक चुन लिया | इसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने राधेश्याम खन्ना को टिकट नहीं दिया और रामबाबू शर्मा को प्रत्याशी बना दिया रामबाबू शर्मा चुनाव जीत कर विधान सभा पहुंच गए |
लेकिन श्री शर्मा बीमारी की चपेट में आ गये | दूसरी बार वे चुनाव तो जीत गये लेकिन चुनाव के तुरंत बाद उनका निधन हो गया | रामबाबू शर्मा के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके पुत्र विपिन शर्मा शीला लहर में चुनाव जीत गए | लेकिन अगली बार हुए चुनाव में भाजपा के जितेन्द्र महाजन के हिस्से जीत आई | कुछ माह बाद ही विधान सभा भंग हो गई और उसके बाद हुए चुनाव में आम आदमी पार्टी की सरिता सिंह केजरीवाल की लहर में चुनाव जीतने में सफल रही, अब अगले साल चुनाव होने हैं | इस चुनाव का परिणाम क्या रहने वाला है ये तो मतगणना के बाद ही सामने आएगा लेकिन चुनावी आंकड़े और विधान सभा के इतिहास के मुताबिक आगामी चुनाव बेहद रोचक रहने वाला है |
इस सीट पर क्या रहेगा इसकी सही तस्वीर तो तीनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी घोषित होने पर ही सामने आएगी लेकिन यदि तीनो ही पार्टियां पिछले चुनाव वाले प्रत्याशियों को ही चुनावी जंग में उतरती हैं तो पुराना मिथक टूट सकता हैं | क्योकि तीनो ही एक-एक बार चुनाव जीत चुके हैं | लेकिन इसकी सम्भावना नहीं के बराबर है | कांग्रेस आप व भाजपा किसे प्रत्याशी बनाती है अभी कह पाना मुश्किल है | हमारा आकंलन पिछले प्रत्याशियों के आधार पर ही है यदि वही प्रत्याशी रहते हैं तो भाजपा की जीत की सम्भावनाएं ज्यादा नजर आती हैं | पिछला चुनाव 7874 वोट से हारने के बावजूद जितेन्द्र महाजन के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई थी | और चुनाव हारने के बावजूद वे पूरे पांच साल क्षेत्र में सक्रिय रहे |
इतना ही नहीं वे सभी के सुख-दुःख में खड़े भी दिखे | जबकि सरिता सिंह चार साल तक न केवल निसकिर्य्र रही अपितु अपने कर्मठ कार्यकर्ताओं और सहयोगियों को भी सम्भाल कर नहीं रख सकी | नतीजन निगम के चारों वार्डों में उन्हें बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा इसी तरह लोक सभा चुनावों में पार्टी प्रत्याशी दिलीप पाण्डेय भी तीसरे स्थान पर पहुंच गए | कांग्रेस पार्टी का ग्राफ शीला दीक्षित के निधन के बाद पुराने लेवल पर ही पहुंच गया है | बावजूद इसके इस सीट पर कांग्रेस का ग्राफ बढने के आसार है जो आप पार्टी के लिए खतरे की घंटी है | पिछले चुनाव में कांग्रेस के विपिन शर्मा को 15 हजार 548 वोट मिले थे यदि यह आंकड़ा इस बार 20 हजार को छू गया तो भाजपा की राह और आसान हो जाएगी |
सी.पी.एन. न्यूज़ के आकंलन के मुताबिक भाजपा जहां 42 फीसदी मत लेती दिख रही है वहीं आप पार्टी का ग्राफ 40 फीसदी पर अटक सकता है | जबकि कांग्रेस 15 फीसदी मत बटोर सकती है | और यदि आप पार्टी अपना प्रत्याशी बदलती है तो इस प्रतिशत में अदला बदली भी हो सकती है | यानी आप पार्टी 45 फीसदी तक पहुंच सकती हैं | तो भाजपा 42 फीसदी और कांग्रेस 12 फीसदी पर ही सिमिट सकती है | 2015 के चुनावों में आप पार्टी को यहाँ 62 हजार 209 मत मिले थे तो भाजपा के खाते में 54 हजार 335 वोट आये थे जबकि कांग्रेस को 15 हजार 548 वोट मिले थे | कुल मिला कर 2020 का चुनाव बड़ा दिलचस्प रहने वाला है रोहताश नगर में हार जीत का अंतर भी थोडा बहुत ही रहेगा |

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