गीतकार मोहित चौहान ने किया सांझ के संगीत का लांच

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नई दिल्ली ( प्रेमबाबू शर्मा )

भारतीय सिनेमा के 100 साल के इतिहास में पहली बार हिमाचल की पहाड़ी भाषा में हिमाचल प्रदेश में बनी फिल्म ‘सांझ देश भर के सिनेमा घरों में रिलीज़ होने जा रही है पहाड़ी के साथ यह फिल्म हिंदी में भी रिलीज़ की जा रही है। जहां हिमाचली में यह फिल्म ‘सांझ नाम से प्रदर्शित होगी, वहीँ हिंदी में यह फिल्म ‘रिश्तों की सांझ के नाम सेरिलीज़ की जाएगी I यह फ़िल्म साइलेंट हिल्स स्टूडियो हमीरपुर के बैनर तले बनी है तथा पीसीयू प्राइवेट लिमिटेड और शौर्य एंटरटेनमेंट एस्टाब्लिशमेंटज द्वारा प्रस्तुत की जाएगी ।
सांझ तथा रिश्तो की सांझ फिल्म का म्यूज़िक रिलीज आज दिल्ली के कनॉट प्लेस में किया गया । सांझ फिल्म में कुल 5 गाने है । फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर धर्मशाला केरहने वाले गौरव गुलेरिया जी है तथा फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक शिशिर चौहान जी ने दिया है । फिल्म के गानो को आवाज़ मशहूर बॉलीवुड गायक मोहित चौहान जी, पवित्रा चारि जी तथा गौरव गुलेरिया जी ने दी है। फिल्म के गानो को बोल आदर्श धीमान, अजय सकलानी तथा श्रेया शाह द्वारा दिए गए है ।
इस अवसर पर मशहूर गायक मोहित चौहान जी भी मौजूद थे। मोहित जी ने कई लोक गीत गाये है लेकिन पहली बार मोहित चौहान जी ने हिमाचली फिल्म के लिए 2 गीतों को अपनी आवाज़ दी है। इनके साथ साथ म्यूजिक रिलीज़ के दौरान सांझ फिल्म के अभिनेता विशाल परपग्गा, अदिति चाडक, निर्माता निर्देशक अजयसकलानी और सहयोगी निर्माता शिवानी सकलानी भी मौजूद थे। अपने संबोधन में अजय सकलानी ने बताया की फिल्म 14 अप्रैल को नज़दीकी सिनेमाघरो में रिलीज होगीऔर फिल्म का प्रिमियर 13 अप्रैल को मुंबई में किया जायेगा ।
सांझ का संगीत फिल्म के डिजिटल पार्टनर हंगामा द्वारा लांच किया गया । इस मौके पर हंगामा से अनुज बाजपाई और राजेश अल्लहाबादी भी मौजूद थे। जिन्होंने बताया कि सांझ के गाने हंगामा वेबसाइट, हंगामा ऍप, एप्पल आई ट्यून तथा विंक म्यूजिक पर सुने जा सकता है ।
‘सांझ’ पहाड़ों से शहरों की तरफ होते पलायन के चलते अपनों से बिछुड़ने और अकेलेपन की कहानी है। यह कहानी दादी और पोती की नज़र से दिखाई गयी है। पोती जोशहर में अपने माता- पिता के साथ रहती है और उसे ज़बरदस्ती गांव में उसकी दादी के पास छोड़ दिया जाता है। दादी और पोती जो कभी एक दूसरे के साथ नहीं रहे, उनके बीच के रिश्ते पर यह कहानी घूमती है। एक दूसरे से द्वेष, तकरार और प्यार के बीच आगे बढ़ती यह कहानी गांव में रहने वाले बुजुर्गों के अकेलेपन को दर्शाती है |

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