गुटबाजी फिर ले डूबेगी दिल्ली में भाजपा को

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नई दिल्ली ( अश्वनी भारद्वाज )

दिल्ली भाजपा में गुटबाजी खत्म होने का नाम नहीं ले रही | दिल्ली की सियासत से करीब दो दशक तक महरूम रहने के बावजूद भाजपा दिग्गज एक होने का नाम नहीं ले रहे | वे यह भी भली भांति जानते हैं बिना एक हुए वोटो का बंटवारा भी उन्हें दिल्ली की सत्ता तक शायद ही पहुंचा पाए | बावजूद इसके उनके अपने अपने स्वार्थ आड़े आ रहे है |
आलम यह है की विपक्ष उनकी खिल्ली उड़ाए तो उनकी बला से और जनता में क्या मैसेज जायेगा उनकी बला से | न हाई कमान का डर है ना अनुशासन की चिंता बस फ़िक्र है तो सिर्फ चौधराहट की | जगजाहिर है दिल्ली भाजपा में सब कुछ तो क्या कुछ भी ठीक से नहीं चल रहा | जनता ने भले ही समर्थन दे दिया और मत विभाजन से निगम में भाजपा की हैट्रिक भी लग गई | लेकिन अभी दिल्ली की सत्ता भाजपा से कौसों दूर है |
मामला निगम की महत्वपूर्ण समितियों का हो या संगठन का सब जगह वही खींचमतान चल रही है जो गत वर्षों में कई बार दोराही गई है | नतीजन पार्टी हालातों के चलते निगम चुनाव जरूर जीत जाती है लेकिन दो दशक से दिल्ली की सत्ता से दूर है | और यही हालत रहे तो पार्टी के लिए दिल्ली फिर दूर हो सकती है | ताजा मामला निगम के महत्वपूर्ण पदों को लेकर है | जहां प्रदेश नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर दिल्ली के दिग्गजों ने सवालिया निशान खड़े करदिए है | दरसल कुछ सीनियर लीडर एक दूसरे को नीचा दिखने के मकसद से प्रदेश लीडरशिप को मोहरा बना अपनी रोटियां सेक रहे हैं लेकिन वे ये भूल रहे है आज भी वो लोग सक्रिय है जिन्होंने उन्हें कई बार दिल्ली की सत्ता के करीब नहीं पहुंचने दिया |
यह बात अलग है फ़िलहाल वो लोग दिल्ली की हकूमत की लाईन में खुद को नहीं दिखाना चाहते l और पर्दे के पीछे से ही खेलना चाहते हैं लेकिन हकीकत यह है वो कल भी इस लाईन में थे और आज भी गोटियां उसी लाईन के लिए ही बिछा रहे हैं | यह बात अलग है की वो नए नेतृत्व को अपने हितो के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं और सब्जबाग उन्हें दिखा रहे हैं | लेकिन हकीकत यह है यदि पार्टी लीडरशिप ने इसे हल्के में लिया तो विधान सभा चुनावो में वो सब नहीं होने वाला जो निगम चुनावो में हुआ था |
दो दशक में भी शायद भाजपा हाईकमान यह नहीं समझ पाया कि लोक सभा चुनाव, विधान सभा चुनाव तथा निगम चुनावो में दिल्ली का मूढ़ अक्सर अलग -अलग होता है | अभी तक दिल्ली में थर्ड फ़्रंट नहीं था लिहाजा भाजपा और कांग्रेस ही सियासत का मजा लेते रहे लेकिन आज हालत बदल गए है यानि ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है |

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