ईश्वर प्रमाद व अवसाद से बचाते हैं——राजेश्वरानंद

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पूर्वी दिल्ली ( सी.पी.एन. न्यूज़ )

भगवदमार्ग प्रमाद यानी आलस्य ओर अवसाद यानी डिप्रेशन से बचाता है यह विचार रामकथा के दूसरे दिन अनारकली गार्डन जगतपुरी स्थित श्रीराजमाता मंदिर में राजेश्वरानंद महाराज ने साध सँगत से कहे।
ब्रह्मलीन राजमाताजी महाराज की पुण्यतिथि पर आयोजित रामकथा के दूसरे दिन शिवपार्वती प्रसंग पर चर्चा करते हुए महाराज ने कहा कि “भगवदमार्ग साधक की प्रमाद (आलस्य) व अवसाद (डिप्रेशन) से रक्षा करता है।भगवान श्री कृष्ण ने साधक को कर्म छोड़कर सब भगवान पर छोड़ने का ज्ञान नहीं दिया बल्कि कर्म को पूर्ण रूपेण तन्मयता से करने के बाद उसके परिणाम को भगवान पर छोड़ने का मार्गदर्शन दिया है।मनुष्य द्वारा कर्म करने के बाद जो भी परिणाम आये अगर वह मन इच्छा के विरुद्ध हो तो इसके कारण मनुष्य अवसाद (डिप्रेशन) से पीड़ित हो जाता हैं परन्तु जो भगवदमार्ग का साधक होता हैं वह सत्संग से प्राप्त विवेक द्वारा परिणाम में से ही हरि इच्छा मानकर कोई अच्छाई फायदा निकालकर अवसाद से बचकर आनन्द मार्ग पर अग्रसर होने लगता है।
स्वामी राजेश्वरानंद ने आगे बोलते हुए कहा कि “मनुष्य को अपनी प्रशंसा व दूसरे की निंदा से बचना चाहिए यानी मनुष्य को चाहिए इन दोनों हालात में विषयांतर यानी चर्चा बदलने का प्रयास करे क्योंकि अपनी प्रशंसा सुनने से अहंकार व परनिन्दा सुनने से पुण्यकर्मों का नाश होता जोकि व्यक्ति को गर्त में गिराने का कार्य करती हैं। कथा विराम के समय सामुहिक हनुमान चालीसा का पाठ व प्रसाद वितरण किया गया।

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