महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक सिस्टम की जरूरत है : मेनका गांधी

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नई दिल्ली ( प्रेमबाबू शर्मा )
ब्रिज काॅन्क्लेव- लिंग सशक्तिकरण पर आधारित सेमीनार का उद्घाटन श्रीमती मेनका गांधी, महिला एवं बाल विकास मंत्री द्वारा नई दिल्ली में किया गया।
इस अवसर पर अन्य प्रमुख वक्ताओं- शर्मिला टैगोर, नंदिता दास, अनखी दास, रोहिनी निलेकणि, सोहिनी घोष, गिन्नी माही, उर्वशी भूटालिया, मोना एल्टाहावी, निवेदिता मेनन आदि उपस्थित थे।
श्रीमती मेनका गांधी ने रक्षा एवं सुरक्षा और वास्तविक सशक्तिकरण से संबंधित मुद्दों पर जोर दिया। छेड़छाड़ के मुद्दे के समाधान के लिए, उन्होंने कहा, ‘‘हमने सेलफोन पर दुनिया के पहले पैनिक बटन की पेशकश करने की अब तक की पहली पहल की है। यह महिलाओं की सुरक्षा के लिए ऐप्प है- एक बार आप बटन क्लिक करेंगे तो यह पुलिस के आने से पहले आपके करीबी 10 लोगों को अलर्ट करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘‘हमने ‘वन स्टाॅप सेंटर्स‘ की पेशकश करने की भी पहल की जोकि महिलाओं के लिए समर्पित है। वन स्टाॅप सेंटर्स इस मुद्दे के लिए एक समाधान हो सकता है। भारत में महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए, हमने हाल में ‘स्टेप‘ नामक एक प्रोग्राम आरंभ किया है। इस  प्रोग्राम का उद्देश्य आॅर्गेनिक फार्मिंग जैसे क्षेत्रों में नौकरियां पाने और अलग-अलग कौशल सीखने पर 200 महिलाओं को प्रशिक्षित करना है। एक और कार्यक्रम है ई-महिला हट जिसमें लोग बाहर से कपड़े खरीदने के बजाय यहां से कपड़े खरीद सकते हैं। हमारे यहां महिलाओं की एक पीढ़ी होनी चाहिये जो देश का नेतृत्व करे और इसकी शुरूआत जमीनी स्तर से होनी चाहिये।‘‘
उद्घाटन सत्र के बाद बाॅलीवुड में महिला कलाकारों के उद्भव पर एक सत्र आयोजित किया गया। इंडस्ट्री में लिंग पक्षपात के अपने अनुभव के बारे में शर्मिला टैगोर ने कहा, ‘‘सभी महिला कलाकारों को कहीं न कहीं बंधन में बंधना पड़ता है और हमें इसी रवैये को बदलने की जरूरत है। सच्चाई यह है कि आज भी कई फिल्में जोकि महिला सशक्तिकरण और इनसे संबंधित मुद्दों पर आधारित होती हैं, उनमें कहीं न कहीं पुरूष प्रधान संदेश होते हैं, और बस यहीं अंतर आ जाता है।‘‘
नंदिता दास ने ‘अक्स‘ एवं ‘फिराक‘ में अपनी भूमिकाओं के बारे में कहा, ‘‘जब मैं सुर्खियों में आई तो मुझे हमेशा ‘‘डार्क एवं डस्की हीरोईन‘ के तौर पर पेश किया गया। कहीं न कहीं फिल्मनिर्माता मेरे रंग को एक निश्चित सामाजिक वर्ग से जोड़कर देखते थे और इसलिए वे इसी रोल को मेरे द्वारा निभाते देखना चाहते थे।‘‘
सम्मेलन में मोना एल्टाहावी, फ्रीलांस इजिप्टियन-अमेरिकन पत्रकार, सुश्री निवेदिता मेनन, प्रोफेसर, पाॅलिटिकल थाॅट, जेएनयू और उर्वशी भूटालिया, सह-संस्थापक, काली फाॅर वुमेन, भारत की पहली फेमिनिस्ट पब्लिशर ने भी भारतीय समाज एवं इसकी संस्कृति के संदर्भ में नारीत्व के विचार को हकीकत में बदलने पर चर्चा की।
इस सम्मेलन के पहले भाग में गिन्नी माही, मशहूर पंजाब पाॅप गायिका ने लाइव परफाॅर्मेंस दी। अपने गानों के जरिये, उन्होंने दलित समुदाय को सामाजिक असमानता के बलों एवं आर्थिक नुकसान के विरुद्ध एकजुट होने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर, गिन्नी माही ने कहा कि महिला सशक्तिकरण एक महत्वपूर्ण विषय है जिसका हल वे अपने गानों के माध्यम से निकालना चाहती हंै।

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