मन, कर्म, वचन अर्पित करें भगवान को : कौशल

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पूर्वी दिल्ली ( सी.पी.एन. न्यूज़ )

भगवान को मन, वचन, कर्म अर्पित करने से ही मनुष्य का कल्याण हो सकता है उक्त विचार व्यक्त किए अयोध्या से पधारे कथावाचक कौशल दास पांडेय ने स्वामी राजेश्वरानन्द के सान्निध्य में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शाहदरा कबुलनगर मदरडेरी के पास भक्तसमुह को | श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन स्वामी राजेश्वरानन्द ने विशेष रूप से उपस्थित रहकर भक्तो को आशीर्वाद दिया | इस अवसर पर बोलते हुए कथावाचक कौशल दास पांडेय ने गुरु महिमा पर चर्चा करते हुए कहा कि “जैसे बादल तो वर्षा के माध्यम से एक समान ही जल बरसाते हैं परन्तु जो बर्तन उल्टे पड़े रहते है उनमें जल नहीं समा पाता इसी प्रकार गुरुज्ञान से वह शिष्य वंचित ही रह जाते है जो गुरु वचनों के विपरीत दिशा में मनमुखी होकर चलते हैं | गुरुदेव अपने शिष्य को धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चारो पदार्थ सुलभ करवा सकते है लेकिन केवल गुरु धारण करने मात्र से नहीं बल्कि गुरु वचनों को आचरण में उतारने से |
वामन अवतार प्रसङ्ग पर भक्तों को आशीर्वचन देते हुए स्वामी राजेश्वरानन्द ने कहा कि वामन अवतार ने राजा बलि से तीन पग भूमि माँगी इससे शिक्षा मिलती हैं कि भगवान मनुष्य से तीन पग यानी मन, वचन, कर्म समर्पित करने का ज्ञान देते हैं | भगवान को पदार्थ नहीं यथार्थ अर्पण करें यानी मनुष्य को पदार्थ तो भगवान द्वारा ही प्रदान किए गए हैं परन्तु यथार्थ यानी तू जैसा है वैसा ही सत्य स्वरूप मुझे अर्पित कर दे | कथाविराम पर भागवत पुराण व गुरुदेव की आरती पूजन के साथ प्रसाद वितरण किया गया |

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