नसीब तय करेगा विश्वास नगर का नसीब

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NEW DELHI, INDIA - JANUARY 19: Naseeb Singh Congress Candidate for the Vishwas Nagar assembly seat makes victory after filling his nomination papers at SDM office, Geeta Colony on January 19, 2015 in New Delhi, India. Polling in Delhi will be held on February 7 and the counting of votes will take place on February 10. (Photo by Virendra Singh Gosain/Hindustan Times via Getty Images)

पूर्वी दिल्ली ( अश्वनी भारद्वाज )

पूर्वी दिल्ली के विश्वास नगर विधान सभा क्षेत्र में इस बार कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी | जिस पार्टी की रणनीति और उम्मीदवार अच्छा होगा जीत उसी के खाते में आएगी | ऐसा हमारा आकंलन है जो जमीनी स्तर पर आधारित है | सैकड़ों लोगों की राय जानने के बाद ही हम ये कह पा रहे हैं | विश्वास नगर की जनता 1993 से 2015 तक हुए विधान सभा के 6 चुनावों में अभी तक तीन बार कांग्रेस तो तीन बार भाजपा में विश्वास जता चुकी है | जबकि दो चुनाव लड़ चुकी आम आदमी पार्टी के नसीब में अभी तक यहां जीत नहीं आई है | आंकड़ो के हिसाब से पिछले 6 चुनावों में कांग्रेस का इस विधान सभा में 41 फीसदी औसत रहा है तो भाजपा का औसत 43 फीसदी रहा है जबकि आम आदमी पार्टी का दो चुनावों में औसत 31 फीसदी ही रहा है |
इस बार ये आंकड़े कहाँ पहुंचते है ये तो चुनाव परिणाम के बाद ही सामने आएगा | हमारा आकंलन पिछले चुनाव में लड़े प्रत्याशियों के आधार पर है | पिछले चुनावों में भाजपा के ओ.पी.शर्मा को 45.15 फीसदी तो कांग्रेस के नसीब सिंह को 16.3 फीसदी मत मिले थे तो आम आदमी पार्टी के डॉ.अतुल गुप्ता को 37.26 फीसदी मत मिले थे | यह आंकड़ा इस चुनाव में पलटी मार सकता है | क्योकि आम आदमी पार्टी यहां से इस बार अपना प्रत्याशी बदलने जा रही है | जबकि भाजपा में भी प्रत्याशी बदलने की बात चल रही है | सही तस्वीर तो तीनों दलों के प्रत्याशी सामने आने पर ही आएगी |
1993 के चुनाव में भाजपा के मदन लाल गाबा यहाँ से चुनाव जीते थे | उन्होंने कांग्रेस के अबजीत सिंह गुलाटी को हराया था | मदनलाल गाबा इससे पूर्व यहाँ से निगम पार्षद भी रहे थे | इस चुनाव में श्री गाबा को 50 फीसदी मत मिले थे जबकि श्री गुलाटी को 38 फीसदी मत मिले थे | माना जा रहा है किन्ही कारणों से यदि ओ.पी. शर्मा की टिकिट कटती है तो श्री गाबा के पुत्र दीपक गाबा पार्टी की पहली पसंद होंगें जो इस समय जिला भाजपा में महामंत्री हैं जिन्हें स्थानीय होने का लाभ मिलेगा | 1998 के चुनाव में कांग्रेस ने युवा चेहरे के रूप में नसीब सिंह पर दावं खेला तो भाजपा ने पुराने खिलाडी डॉ. वेद व्यास महाजन को मैदान में उतारा | नसीब सिंह को 48.18 फीसदी तो डॉ.महाजन को 47.15 फीसदी वोट मिले जो मामुली अन्तराल से चुनाव हार गये | 2003 के चुनावों में शीला दीक्षित की लहर और अपने किये कार्यों की बदौलत नसीब सिंह को बम्पर जीत मिली | उन्हें 61.55 फीसदी वोट मिले तो भाजपा के मदन लाल गाबा को महज 33.92 मतों से संतोष करना पड़ा |
2008 के चुनावों में कांग्रेस के नसीब सिंह नें 51.09 फीसदी वोट लेकर अपनी जीत की हैट्रिक जमाई तो भाजपा के ओ.पी. शर्मा को 41.1 फीसदी वोट मिले | 2013 में आम आदमी पार्टी भी मैदान में उतरी और उसने चुनाव त्रिकोणीय बना दिया | जिसके चलते भाजपा के ओ.पी. शर्मा 38 फीसदी वोट लेकर ही जीत गये | इस चुनाव में कांग्रेस के नसीब सिंह को 31.38 तो आम आदमी पार्टी के डॉ.अतुल गुप्ता को 25.77 फीसदी वोट मिले और वे तीसरे पायदान पर रहे | 2015 के चुनावों में भी विश्वास नगर ने भाजपा के ओम प्रकाश शर्मा पर विश्वास जताया और उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 45.15 फीसदी 58 हजार 124 वोट लेते हुए जीत दर्ज की आम आदमी पार्टी के डॉ. अतुल गुप्ता को 37.26 फीसदी 47 हजार 966 वोट मिले | तो कांग्रेस के नसीब सिंह को अपने लड़े पांच चुनावों में सबसे कम 16.3 फीसदी 20 हजार 634 मत ही मिल सके | 2020 का चुनाव यहां कांटे का रहने वाला है यदि भाजपा ने प्रत्याशी नहीं बदला तो तीनो दलों में से कोई भी जीत सकता है |
क्योकि दो कार्यकाल पूरा करने के बाद भाजपा के ओ.पी. शर्मा को एंटी क्म्बेसी का सामना करना पड़ेगा इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता, ऐसा हम अपने सर्वे के आधार पर बता रहे हैं आपको | दो चुनाव हरने के बाद लोग नसीब सिंह के कार्यकाल को याद भी कर रहे हैं कुल मिलाकर आने वाले चुनाव में यहां रहने वाली है कांटे की टक्कर | हमारे सर्वे में लोगो ने क्या कुछ बताया वो भी दिखायंगे आपको |

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