पंकज लूथरा को कांग्रेस ने चुनाव लडवाया तो बदल सकते हैं शाहदरा सीट के समीकरण

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नई दिल्ली ( अश्वनी भारद्वाज )

पूर्वी दिल्ली का शाहदरा विधान सभा क्षेत्र वैश्य बाहुल्य माना जाता है | विधान सभा के 6 चुनावों में से पांच बार वैश्य प्रत्याशी यहां से चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंच चुके है | जिनमे से तीन बार कांग्रेस के डॉ. नरेंद्र नाथ तो दो बार रामनिवास गोयल पहली बार भाजपा से तो दूसरी बार आम आदमी पार्टी से चुनाव जीते हैं | केवल एक बार भाजपा के खाते से गैर वैश्य जितेन्द्र कुमार शन्टी जीतने में सफल रहे हैं | 2015 के चुनाव में आम आदमी पार्टी के तुफान में राम निवास गोयल को 58 हजार 523 मत यानी 49.49 फीसदी मत मिले थे भाजपा के जितेन्द्र शंटी को 46 हजार 792 यानी 39.57 फीसदी तो कांग्रेस के डॉ. नरेंद्र नाथ को मात्र 9 हजार 423 यानी 7. 97 फिस्ती मत मिले थे |
यहां से पांच बार विधान सभा, एक बार महानगर परिषद और एक बार नगर निगम का चुनाव लड़ चुके डॉ. नरेंद्र का यह सबसे कमजोर प्रदर्शन रहा था | 1993 के चुनाव से राम निवास गोयल का भाजपा से सफर शुरू हुआ था | उस चुनाव में उन्हें 53.32 फीसदी मत मिले थे जबकि कांग्रेस के चमन लाल यादव को 30.36 फीसदी ही मत मिल पाए थे | 1988 के चुनाव में कांग्रेस ने डॉ. नरेंद्र नाथ को मैदान में उतारा तो उन्हें 55.86 फीसदी मत के साथ बम्पर जीत मिली उस चुनाव में भाजपा की ज्योत्स्ना अग्रवाल को महज 38.61 फीसदी वोट ही मिल पाए | 2003 के चुनाव में कांग्रेस के नरेंद्र नाथ 42.86 फीसदी मत लेकर जीते तो भाजपा के डॉ.वेद व्यास महाजन 21.34 फीसदी मत ही ले पाए और वो तीसरे स्थान पर रहे | उनसे ज्यादा मत निर्दलीय जितेन्द्र शंटी के रहे जिन्हें 21.47 फीसदी वोट मिले |
2008 का चुनाव शीला दीक्षित की लहर का चुनाव था | जिसमे डॉ. नरेंद्र नाथ ने 44.89 फीसदी मत लेते हुए जीत की हैट्रिक जमाई | भाजपा के जितेन्द्र शंटी कड़े मुकाबले में 43.13 फीसदी मत लेने में सफल रहे | 2013 के चुनाव में आम आदमी पार्टी भी मैदान में आ चुकी थी | मुकाबला त्रिकोणीय था जिसमें जितेन्द्र सिंह शंटी 42.96 फीसदी मत लेकर चुनाव जीत गये | कांग्रेस के डॉ. नरेंद्र नाथ को 28.64 फीसदी तो आम आदमी पार्टी के बलबीर सिंह को 22.26 फीसदी मत मिले और वे तीसरे पायदान पर रहे |
2020 का चुनाव बेहद रोचक रहने वाला है | आम आदमी पार्टी एक बार फिर से राम निवास गोयल पर ही दावं लगाती दिख रही है | वहीं कांग्रेस और भाजपा किसे प्रत्याशी बनाएगी अभी तय नहीं है | सही तस्वीर तो तीनों दलों के प्रत्याशी घोषित होने पर ही सामने आएगी | लेकिन कांग्रेस यदी यहां से पूर्व पार्षद पंकज लूथरा को मैदान में उतारती है तो इस सीट के समीकरण बदल सकते हैं | और यहां मुकाबला त्रिकोणीय और रोचक होने की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता | उल्लेखनीय है कि विपरीत हालातों में भी पहले पंकज लूथरा तो बाद में उनकी पत्नी गीतिका लूथरा यहां से निगम चुनाव जीत चुके हैं |
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