शीला दीक्षित को मिल रही है फिर से कमान

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नई दिल्ली ( अश्वनी भारद्वाज )

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से अजय माकन की छुट्टी कर दी गई है | हालाँकि कांग्रेसी परम्परा के तहत उनका इस्तीफा मंजूर किया गया है, जो उनसे कई माह पूर्व माँगा गया था | बार-बार समझाने के बाद भी माकन इस बात पर अड़े थे कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी से कोई चुनावी गठ्बन्धन नहीं होना चाहिए जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के लिए एक-एक सीट का महत्व है |और राहुल अच्छी तरह जानते हैं दिल्ली में बिना आप पार्टी से गठ्बन्धन किये एक भी सीट पर जीत दर्ज करना आसान नही है |
माकन की विदाई तो पहले ही हो जाती लेकिन पांच राज्यों के चुनावों के चलते ऐसा नहीं हो सका | यह बात अलग है चुनावी साल होने के चलते माकन को केन्द्रीय स्तर पर एडजस्ट करने में पार्टी कंजूसी नहीं बरतेगी | माकन के इस्तीफे के बाद ही करीब तीन माह पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी ने दिल्ली की कमान एक बार फिर से पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को सौपने का मन बना लिया था | लेकिन बीमारी के चलते शीला दीक्षित को ईलाज के लिए विदेश जाना पड़ा था लिहाजा उस वक्त फैसला नहीं हो सका और राहुल गाँधी समेत तमाम दिग्गज चुनाव प्रचार में जुटे थे |
हालाँकि शीला दीक्षित पहले यह जिम्मेदारी लेने से बच रही थी लेकिन पार्टी हाईकमान यह अच्छी तरह से जानता है राजधानी दिल्ली में पार्टी के साथ-साथ हैवी वेट चेहरा भी चाहिए इन हालत में शीला के सामने और कोई नाम नहीं टिकता | शीला को वोट जुटाऊ करिश्माई नेता के रूप में जाना जाता है | भाजपा के हाथ से सत्ता छीन डेढ़ दशक तक सत्तासीन रही शीला दीक्षित अन्ना आन्दोलन के चलते जरुर सत्ता से बहर हो गई थी और अरविन्द केजरीवाल की लहर के चलते उन्हें हार का सामना करना पडा था | बावजूद इसके आज भी जनता उनके कार्यकाल में हुए विकास कार्यों को भुला नहीं पाई है |
आज भी लोगों को कहते हुए सुना जा सकता है शीला दीक्षित ने दिल्ली का चेहरा ही बदल डाला था | इसमें कोई दिस-दैट नही कि शीला दीक्षित दिल्ली कांग्रेस की अगली अध्यक्ष बनने जा रही हैं बावजूद इसके हर बड़े पद के लिए बड़े नेता लोबिंग में जुट जाते है और पार्टी भी विकल्प तलाशती है | अन्य मजबूत दावेदारों में पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जे.पी. अग्रवाल व पूर्व स्पीकर डॉ. योग नन्द शास्त्री के नाम भी शामिल हैं | हालाँकि जे.पी. बातचीत में अपने को इस मसले से अलग बताते हैं अन्य नामों में राज कुमार चौहान, अरविन्द्र सिंह लवली डॉ. ऐ.के. वालिया हारून युसूफ के नाम बताये जा रहे हैं |
लेकिन चुनावी साल में ये सभी नाम शीला के नाम के सामने बौने दिख रहे हैं | और पार्टी हाई कमान ऐसे में कोई रिस्क लेने के मूड में नही दिखता | अलबत्ता शीला दीक्षित के साथ योगा नन्द शास्त्री राज कुमार चौहान, व मतीन अहमद को वर्किंग प्रेजिडेंट भी बनाये जा सकते हैं | इस सूचि में हारून युसूफ भी हो सकते हैं | जबकि जे.पी. अग्रवाल के कद को देखते हुए उन्हें केंद्र में भेजने पर मंथन हो सकता है | जे.पी. की गिनती दिल्ली के पुराने अनुभवी नेताओं में शुमार है |
शीला दीक्षित गाँधी परिवार की पसन्दिदा सदैव रही है | स्व. राजीव गाँधी सोनिया गाँधी व राहुल गाँधी से ले प्रियंका गाँधी उन्हें सम्मान की द्रष्टि से देखते रहे हैं और शीला की कार्यशली को पसंद करते रहे हैं, इसलिए शीला का पलड़ा औरों पर हमेशा भारी रहा है……

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