समयपूर्व कदम उठाने से ब्लड शुगर और ‘बैड कोलेस्ट्राॅल’ कम करने में​​ मिल सकती है

0
31
नई दिल्ली ( प्रेमबाबू शर्मा )
समयपूर्व कदम उठाने से ब्लड शुगर और ‘बैड कोलेस्ट्राॅल’ कम करने में मिल सकती है | इस बात का खुलासा प्रमुख डाॅक्टरों ने एक वार्ता में किया। उन्होंने बताया कि जहां युवाओं को आर्थिक संपन्नता का लाभ मिल रहा है, वहीं बदलती जीवनशैली एवं आनुवांशिक पूर्व-प्रवत्तियां उन पर विपरीत प्रभाव भी डाल सकती हैं, इसलिए भारत की एक पूरी पीढ़ी के सामने बड़ा खतरा है। पूरे भारत से 200 से अधिक शोधकर्ता एवं डाॅक्टर नई दिल्ली में एनसीडी प्रि-डिज़ीज़ फोरम द्वारा आयोजित किये जा रहे प्रोटेक्ट यंग इंडिया समिट में भाग ले रहे हैं।
        विशेषज्ञों ने कहा कि 30 से 60 साल के युवाओं पर समयपूर्व कार्डियो-मेटाबाॅलिक बीमारियों का यह भार एक बड़ी सामाजिक एवं आर्थिक चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है, जब हमें व्यापक आबादी पर मंडरा रहे इस खतरे पर केंद्रित हो जाना चाहिए, ताकि इस बीमारी की प्रारंभिक अवस्था या फिर इसकी सीमारेखा पर खड़े लोग बीमारी बढ़ने से पहले ही रोकथाम के उपाय कर सकें। यहां मौजूद डाॅक्टर एस्सेन अध्ययन के परिणामों पर चर्चा कर रहे थे। इस अध्ययन को दिल की बीमारी एवं डायबिटीज का खतरा कम करने के लिए खाने से प्राप्त बायोएक्टिव्स के सुरक्षित एवं प्रभावशील होने का मूल्यांकन करने के लिए देश में संचालित किया गया था।
       डायबिटीज एवं दिल की बीमारी भारत में स्वास्थ्य की एक गंभीर समस्या है। उपचार के दिशानिर्देशों का नियम है कि इन बीमारियों के लिए दवाईयां केवल तभी दी जा सकती हैं जब जांच में इन बीमारियों (डायबिटीज या उच्च कोलेस्ट्राॅल) की पुष्टि हो जाए। इसका मतलब है कि जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा, जो इन बीमारियों की सीमारेखा पर है, यानि जिनके खून में सामान्य से अधिक शुगर या कोलेस्ट्राॅल है, और जो बीमारी की पूर्ववर्ती अवस्था में हैं, उनके लिए वर्तमान में रोकथाम का कोई भी इलाज संभव नहीं है।जीवनशैली के बदलाव एक संभावित साधन हो सकते हैं, लेकिन अनुभवों में सामने आया है कि नियमों को पूरी तरह से पालन न करने से इसके अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आते हंै।
       इस मौके पर प्रो. एन. के. गांगुली, भूतपूर्व डायरेक्टर-जनरल, इंडियन काउंसिल आॅफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) एवं डायरेक्टर, एनसीडी प्रि-डिजीज फोरम, इंडिया, ग्लोबल फोरम ,चेन्नई से सीनियर कंसल्टेंट, काॅर्डियोलाॅजिस्ट एवं इस अध्ययन के एक परीक्षक, डाॅ. अब्राहम ऊमैन डाॅ. हेमंत थैकर ने भी अपने विचार रखे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here