मातृभाषा में मिला ज्ञान बनाता है देश को विश्व में अग्रणी : अतुल कोठारी

0
19

 नई दिल्ली (इंविसंके)

भारतीय भाषा मंच द्वारा कांस्टीटूशन क्लब दिल्ली में “भारतीय भाषाऐं एक विमर्श” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गयी। मुख्य वक्ता के रूप में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने भारतीय भाषाएं एवं उनके विस्तार तथा व्यवहारिकता की वैज्ञानिकता के विषय में अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने बताया की आज हिंदी देश और दुनिया में बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। देश में भ्रम है की पूर्वोत्तर भारत में हिंदी नहीं बोली जाती, जबकि वास्तव में वहां भी सामान्य लोगों की बोलचाल हिंदी है। इसी तरह दक्षिण के राज्यों में भी हिन्दी का कोई विरोध नहीं है, वहां भी अब लोग हिन्दी सीख रहे हैं। दुनिया में सौ के लगभग देशों में, ऑक्सफ़ोर्ड, हार्वर्ड जैसे शीर्ष विश्वविद्यालयों में हिंदी पढाई जा रही है। श्री कोठारी ने चिंता व्यक्त की कि अंग्रेजों ने भाषा के विषय में जो परंपरा स्थापित की वह आज भी यहाँ चल रही है। उनकी फूट डालो की नीति के कारण कई बार अपनी ही भाषाओं के बीच झगड़ें शुरू हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि बच्चा जन्म लेते ही सबसे पहले अपनी माँ से ही सीखता व समझता है। जो भाषा वह उस समय नैसर्गिक रूप से माँ से सीखता है वह उसकी मातृभाषा भाषा बन जाती है तथा जीवन पर्यंत उसी भाषा में वह सोचता है। इसलिए जिस भाषा में हम सोचते हैं उस भाषा में अपने विचार, कार्य तथा शोध का प्रस्तुतीकरण अन्य भाषाओं की तुलना में बेहतर ढंग से कर सकते हैं। दुनिया के सभी विकसित देशों में प्राथमिक शिक्षा से लेकर मेडिकल, इंजीनियरिंग तथा विश्वविद्यालयों की उच्च शिक्षा तक का माध्यम उनकी मातृभाषा में ही छात्रों को मिल जाता है। जापान, जर्मनी, फ्रांस, दक्षिणी कोरिया, इटली, चीन, रूस, इजराइल जैसे विकसित तथा सर्वाधिक वैज्ञानिक उन्नति करने वाले देशों में शिक्षा, व्यवसाय तथा राजकीय कार्यों में उनकी मातृभाषा का ही प्रयोग होता है न कि अंगरेजी भाषा का। मातृभाषा में गौरव की अनुभूति करने वाले शीर्ष पदों पर बैठे वहां के बहुत से विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक तथा राजनेताओं आदि को अंगरेजी सीखने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। अन्तराष्ट्रीय मंचों में आवश्यकतानुसार उनके लिए अनुवादक रहते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता यूनिलीवर कंपनी के अन्तर्राष्ट्रीय लीडर एवं सामाजिक उपकर्मी महमूद खान द्वारा की गयी, मुख्य अतिथि आयकर आयुक्त हैदराबाद बी.वी. गोपीनाथ , विशिष्ठ अतिथि के रूप में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय निदेशक राजीव जैन, एल.आई.सी. दिल्ली मंडल प्रबंधक के प्रबंधक राजेश कुमार तथा सुशील गुप्ता ने भी अपने विचारों से आगंतुकों का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष व वरिष्ठ शिक्षाविद दीनानाथ बत्रा विशेष सानिध्य रहा। कार्यक्रम का मंच संचलन नितिन द्वारा किया गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here