मुलाकात: भजन सम्राट कुमार विशु से

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नई दिल्ली (सी.पी.एन)ः- कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा, कभी गिरते  हुए को उठाया नहीं बाद आंसू बहाने से क्या फायदा। ये भजन आज से कुछ साल पहले बच्चे-बच्चे की जुबान पर था। जिसे आज भी लोग उसी अंदाज में गुनगुनाते हुऐ सुने जा सकते है। रोम-रोम को हिला देने वाला यह भजन गाया है भजन सम्राट कुमार विशु ने।
कुमार विशु भजन की दुनियाँ में आज शिखर पर है संगीत अध्यापक की नौकरी से अपना कैरियर शुरू करने वाले कुमार विशु आज न केवल हिंदुस्तान में अपितु पूरे विश्व में प्रसिद्ध हो चुके है। देश-विदेशों में लोग भजनसुनने के लिए उनकी राह ताकते हैं।
(सी.पी.एन) की टीम भी भजन सुनने उनके निवास स्थान पर पहुँची जहाँ बड़ी गर्मजोशी से उन्होने हमारी टीम का स्वागत किया और अपने दिल की बात साझा की। हमारे आग्रह पर उन्होने एक-दो नहीं बल्कि अपने कईभजन सुनाऐ।
कुमार विशु ने हमे यह भी बताया पहले उनका नाम विशु भटनागर था। लेकिन संगीत की दुनियाँ ने उन्हे नया नाम कुमार विशु दिया। जो भजनों के साथ-साथ हिट हो गया।
कुमार विशु बताते है उनकी पहली एलबम ही इतनी हिट हो गई कि उन्हे देश भर में ख्याति मिल गई। वे कहते है उन पर ईश्वर की पूरी मेहरबानी है।
विशु बताते है परेशानियाँ इंसान को मजबूत बनाती है। उन्होने कहा सीखने की कोई उम्र नहीं होती। हर स्टेज पर सीखना चाहिए। वे कहते है हर गायक फिल्मों के लिऐ गाना चाहता है। शुरू में तो मैं भी सोचता था। लेकिन जब मुझे लगा ईश्वर मुझे अपनी भक्ति में ही लीन रखना चाहता है तो मैंने भी ईश्वर का दामन पकड़ लिया और प्रभु ने मेरा।
विशु बताते है संघर्षों को पार करके उन्होने मुकाम हासिल किया है। उन्होने बताया उनका जन्म मुंबई में हुआ और संघर्ष दिल्ली में किया। उनका सौभाग्य है उन्हे संगीत की दुनियाँ मे योग्य गुरू मिले। दिल्ली विश्वविद्यालय का जिसमे बड़ा योगदान रहा।
कुमार विशु ने सिटी पाॅवर न्यूज (सीपीएन) को अपनी शुभकामनाऐं देते हुए उम्मीद जताई सिटी पाॅवर वास्तव में शहर की ताकत बने और देश को एक नई दिशा देने में अपना योगदान दें।

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