कवि को निभाना चाहिए अपना धर्म : डॉ. ब्रिजपाल सिंह संत

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नई दिल्ली ( आशीष कुमार / अंकित शर्मा )

आज कविता निम्न स्तर पर जा रही है | अनेक कवि केवल और केवल तालियां बटोरने में लगे रहते हैं उन्हें इस से मतलब नहीं वो किस टाइप की रचना का पाठ कर रहे हैं और समाज में इसका क्या मैसेज जायेगा | उन्हें तो केवल तालियां चाहिए | ताली नहीं बजी तो कविता फेल | इसलिए कुछ तो कहकर ही ताली बजवाते हैं | यह कहना हास्य रस के सुप्रसिद्व कवि संत ब्रिजपाल सिंह का |
सी.पी.एन. से मुलाकात में डॉ.संत कहते हैं आज हालत यह है की श्रोता तनाव में रहते हैं और कुछ कवि अपने कवि धर्म का पालन नहीं कर रहे | उन्हें अपने धर्म का पालन कर समाज को सही दिशा देनी चाहिए |

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