संघर्षशील कलाकारों के असल जीवन की कहानी है ‘बाॅलीवुड डायरीज़’

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नई दिल्ली ( प्रेमबाबू शर्मा )
संघर्षशील कलाकारों के असल जीवन को पर्दे पर उतारने जा रहे निर्माता डाॅ. सत्तार दीवान फिल्म ‘बाॅलीवुड डायरीज़’ के द्वारा । पेशे से चिकित्सक (मशहूर फार्मा राजस्थान औषधालय फेम) डाॅ. दीवान ने बाॅलीवुड का सच सामने लाने की पूरी-पूरी कोशिश की। आखिर सच सामने लाने का प्रयास किसलिए किया डाॅ. सत्तार ने ? डाॅ. सत्तार कि वास्तविकता उनका जवाब और सच्चाई जानकर मैं बहुत असमंजस मंे खोते ही चला जा रहा था। जैसे-जैसे ‘बाॅलीवुड डायरीज़’ के पन्ने खुलते जा रहे थे हर कलाकार का संघर्ष सामने चला आ रहा था। यह फिल्मी संघर्ष बाॅलीवुड की चमक दमक भरी दुनिया मंे क़दम रखने पर क्या-क्या तकलीफ़ें, ज़िल्लतें और मानसिक त्रास झेलता है उसका पूर्वालोकन ह,ै फिल्म ‘बाॅलीवड डायरीज़’।
                            फिल्म ‘बाॅलीवुड डायरीज़’ तीन युवा जो तीन अलग-अलग शहर से  बाॅलीवुड में किस्मत आजमाने आए हैं। उनकी रियल लाइफ और रील लाइफ में क्या घटता क्रम घटता है उसी को पर्दे पर उतारने का प्रयास किया है। यह कहना अनुचित नहीं होगा कि हर सिनेमा संघर्षी (जिसे हम स्ट्रगलर कहते हैं) बाॅलीवुड की राह पकड़ने से पहले एक बार यह फिल्म ‘बालीवुड डाॅयरज़ी’ ज़रूर देख लेनी चाहिए। विशेष बात तो यह है कि फिल्म को ईमानदार प्रस्तुति देने के लिए निर्माता डाॅ. सत्तार ने फिल्म की भूमिका अपने छोटे भाई सलीम दीवान से अभिनीत करवाई है, जो इस फिल्म में मुख्य भूमिका कर रहे हैं। फिल्म की नायिका का किरदार राइमा सेन ने बड़े ही ईमानदारी से निभाया है। फिल्म में उनका अभिनय तारीफे काबिल है और नेचुरल लगता है। और अधेड़ उम्र के कलाकार की भूमिका मशहूर कलाकार आशीष विद्यार्थी ने निभाई है जो एवार्ड विनिंग हैं। जो भी इस फिल्म को सिनेमा हाॅल से देखकर बाहर निकलेगा तो उसे फिल्मी दुनिया की सच्चाई का पता चलेगा। फिल्म के नायक सलीम दीवान युवा वर्ग को रिप्रेजेन्ट करते हैं। वह एक थियेटर आर्टिस्ट हैं। अपने पारिवारिक व्यवसाय (मेडिकल से हट कर) सलीम को फिल्मांे का शौक लगा था। इस शौक की इंतिहा और समर्पण को महसूस करते हुए बड़े भाई ने जाना की सिनेमा आज के युग के लिए एक रिलेजन जैसा है। फिर क्यांे ना एक बार आईना बनाकर फिल्मी दुनिया के सामने पेश किया जाए। फिल्मी संघर्षीयों के सामने जो अंजाने मंे फिल्मी दुनिया की तरफ क़दम उठाता है उन्हें एक राह दिखाने की एक भरपूर कोशिश की है। संघर्ष की यही सोच लड़कियों में भी हैं। काॅलेज की पढ़ाई पूरी कर रही लड़कियां या आफिस गोइंग लड़किया या स्त्रियां सिनेमा सबके लिए एक ख़्वाब है। और इस ख़्वाब की कभी-कभी किसी को बहुत बड़ी कीमत भी जाने-अनजाने में चुकानी पड़ती है।
                   फिल्म के नायक सलीम दीवान ने पर्दे पर अपने किरदार को जिस तरह पूरी ईमानदारी से और लगन से और सच्चाई के साथ पेश किया है सलीम ने एक ऐसा किरदार निभाया है जो सिनेमा में हर क्षेत्र में अपना क़दम रखने की कोशिश करता है। चाहे नायक हो, चाहे खलनायक हो, चाहे काॅमेडियन हो। यहां तक कि सलीम फिल्म में प्ले बैक सिंगर बनने का भी मौका नहीं छांेड़ना चाहते। और यही वास्तविकता है आज के उन स्ट्रगलरों की मायानगरी में जो आते तो हैं नायक बनने लेकिन अंत मंे जो भी काम मिले उसे अपनाकर अपने आपको इस बाॅलीवुड मंे स्थापित करें।

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